. डडुमाजरा डंपिंग ग्राउंड: प्रशासन के लिए 'सोने के अंडे देने वाली मुर्गी' या जनता के स्वास्थ्य का सौदा?
बार-बार फेल होती डेडलाइन और हाईकोर्ट की फटकार: क्या बच्चों और बुजुर्गों की जान से बड़ा कोई टेंडर है?
संसद से लेकर कोर्ट तक पोल खुली: 42.18 करोड़ के बजट के बावजूद धरातल पर केवल 'खतरनाक ढेर' और ज़हरीला धुआँ!
डडुमाजरा डंपिंग ग्राउंड पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं, जनता को जहरीले वातावरण से मुक्ति दिलाए प्रशासन : राजबीर सिंह भारतीय
बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों के स्वास्थ्य से बड़ा कोई टेंडर नहीं; बार-बार समयसीमा चूकने पर नगर निगम की जवाबदेही तय हो: राजबीर सिंह
चंडीगढ़: "डडुमाजरा का यह डंपिंग ग्राउंड अब कचरे का ढेर नहीं, बल्कि ऐसा लगता है 'सोने के अंडे देने वाली मुर्गी' बन गया है, जिसे सुनियोजित तरीके से साफ नहीं किया जा रहा है। ऐसा क्या 'सोने की खदान' गाड़ रखी है यहाँ, जिसे हटाने में बार-बार हाईकोर्ट में तारीखें मांगी जाती हैं और हर बार डेडलाइन फेल कर दी जाती है?"
यह कड़े और तीखे शब्द राजबीर सिंह भारतीय (अध्यक्ष, ऑल इंडिया अम्बेडकर महासभा रजि. चंडीगढ़ प्रदेश एवं समाजसेवी, सेवानिवृत्त अधीक्षक, एजी ऑफिस हरियाणा) ने प्रशासन और नगर निगम चंडीगढ़ की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहे।
संसद में खुली पोल और हाईकोर्ट की सख्त नाराजगी:
संसदीय सच: हाल ही में संसद में सांसद मनीष तिवारी द्वारा डंपिंग ग्राउंड के निस्तारण हेतु पूछे गए सवाल पर आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत ₹42.18 करोड़ (जिसमें केंद्र का हिस्सा ₹28.50 करोड़ है) का भारी-भरकम बजट मिलने के बावजूद धरातल पर काम शून्य है और इसका वैज्ञानिक निपटान करना नगर निगम की जिम्मेदारी है।
अदालत का हंटर और नया नाटक:
बार-बार समयसीमा चूकने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है और दोटूक कहा है कि यह मामला अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। इसके बावजूद नगर निगम ने कोर्ट में नया भरोसा देकर कचरा हटाने की नई तारीख 15 नवंबर का झुनझुना थमा दिया है।
फेल डेडलाइन का इतिहास:
पूर्व में 31 दिसंबर 2024, 31 मार्च 2025, 31 जुलाई 2025, 30 नवंबर 2025 और 31 जनवरी 2026 तक की सभी डेडलाइन पूरी तरह विफल साबित हो चुकी हैं।
नवजात शिशुओं से लेकर बुजुर्गों तक पर मंडराता मौत का साया:
डडुमाजरा, सेक्टर 38, धनास, मलोया, सेक्टर 37, 25 और आसपास के हवा के दायरे में आने वाले क्षेत्रों का हवाला देते हुए श्री भारतीय ने कहा कि:
यहाँ जन्म लेने वाले मासूम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के फेफड़े जहरीले धुएं और बदबू से छलनी हो रहे हैं।
समय से पहले ही लोग दमा, खांसी, टीबी, गंभीर एलर्जी, सांस लेने के संक्रमण और अन्य जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
विडंबना यह है कि स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन ने कभी भी घर-घर जाकर कोई मेडिकल सर्वे नहीं किया और न ही कभी सदन में इसका कोई असली आंकड़ा पेश किया कि इस जहरीले वातावरण ने कितने लोगों को असमय काल के गाल में धकेल दिया है।
ऑल इंडिया अम्बेडकर महासभा की प्रमुख मांगें:
ऑल इंडिया अम्बेडकर महासभा (रजि.), चंडीगढ़ प्रदेश ने प्रशासन और नगर निगम से निम्नलिखित कदम तत्काल उठाने की मांग की है:
1. विशेष स्वास्थ्य शिविर एवं घर-घर सर्वेक्षण: डडुमाजरा, धनास, मलोया और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें भेजी जाएं, नागरिकों की स्वास्थ्य जांच कराई जाए और सर्वेक्षण के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं।
2. निःशुल्क उपचार की व्यवस्था: प्रदूषण से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित जरूरतमंद नागरिकों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्राथमिकता के आधार पर जांच, उपचार और आवश्यक दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाएं।
3. वायु एवं भूजल की स्वतंत्र जांच: मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से वायु गुणवत्ता (AQI), दुर्गंध के स्रोतों और भूजल (Leachate से प्रभावित) की वैज्ञानिक जांच कराई जाए। रिपोर्ट सार्वजनिक कर उसके आधार पर कार्रवाई हो।
4. बजट और टेंडर का हिसाब सार्वजनिक हो: स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत धनराशि, जारी राशि, खर्च, ठेकेदारों की जिम्मेदारियों और कार्य की वास्तविक प्रगति का विवरण सार्वजनिक किया जाए।
5. जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो: बार-बार हाईकोर्ट को गुमराह कर झूठे हलफनामों और तारीखों के खेल से जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाए।
"चंडीगढ़ को 'स्मार्ट सिटी' का मुखौटा पहनने की जरूरत नहीं है, यहाँ के नागरिकों को साफ़ हवा और जीने का मौलिक अधिकार चाहिए। यदि प्रशासन अपनी कार्यशैली नहीं सुधारता, तो इस अन्याय के खिलाफ जनता और न्यायालय का दरवाजा फिर से खटखटाया जाएगा। जनता का जीवन किसी भी टेंडर, ठेके या प्रशासनिक लापरवाही से अधिक महत्वपूर्ण है।"
स्मार्ट सिटी का मतलब वहाँ के रहने वाले लोगों के चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहे ना कि हमेशा बिजली-पानी कुडे कचरे बिमारी स्वास्थ्य के सम्बन्धित सुविधाओं के झुझते रहें?
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें