महर्षि वाल्मीकि जयंती पर कोटि-कोटि नमन, शिक्षा को बनाएं सामाजिक परिवर्तन का आधार : राजबीर सिंह भारतीय
महर्षि वाल्मीकि जी के आदर्शों को अपनाकर शिक्षा, समानता और मानवता को मजबूत करने का आह्वान: भारतीय
चंडीगढ़, 25 अक्टूबर 2026।
महर्षि वाल्मीकि जयंती के पावन अवसर पर राजबीर सिंह भारतीय, अध्यक्ष, चंडीगढ़ प्रदेश, ऑल इंडिया अम्बेडकर महासभा (रजि.) ने समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए महर्षि वाल्मीकि जी को कोटि-कोटि नमन किया।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी केवल रामायण के रचयिता ही नहीं, बल्कि ज्ञान, सत्य, न्याय, समानता और मानवता के महान प्रतीक हैं। उनका जीवन और उनकी रचनाएं समाज को अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ने तथा सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कलम और ग्रंथ ज्ञान, चेतना तथा सामाजिक परिवर्तन के सशक्त प्रतीक हैं। महर्षि वाल्मीकि जी को लेखन और ज्ञान-साधना से जोड़कर देखा जाता है। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर हमें शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। शिक्षा ही वह माध्यम है, जो व्यक्ति को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाती है तथा समाज में व्याप्त भेदभाव, अज्ञान और असमानता को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों और समाज का कोई भी वर्ग शिक्षा से वंचित न रहे। माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षित करने के साथ-साथ उनमें वैज्ञानिक सोच, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करें।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी के आदर्शों को केवल जयंती समारोहों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि शिक्षा, महिला सम्मान, सामाजिक समानता, आपसी भाईचारे और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए निरंतर कार्य करना चाहिए।
अंत में उन्होंने सभी देशवासियों से आह्वान किया कि महर्षि वाल्मीकि जयंती पर शिक्षा को बढ़ावा देने, सामाजिक एकता मजबूत करने और मानव कल्याण के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लें, ताकि एक ऐसे समाज का निर्माण हो सके जहां प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, समान अवसर और न्याय प्राप्त हो।
जय भीम, जय भारत!
महर्षि वाल्मीकि जी को शत-शत नमन।
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