शूर्पणखा प्रसंग और जटायु मोक्ष के सजीव मंचन ने दर्शकों को किया भावविभोर, 45 वर्षों की रामलीला सेवा के लिए निर्देशक प्रदीप कुमार सम्मानित


पुनीत महाजन  चंडीगढ़, 15 अक्टूबर 2026।

सेक्टर-51 स्थित रामलीला मैदान में जय श्री रामलीला मंच (रजि.), सेक्टर-51, चंडीगढ़ की ओर से आयोजित भव्य रामलीला के छठे दिन श्रद्धालुओं और दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान शूर्पणखा की नासिका छेदन, सीता हरण और जटायु मोक्ष के प्रसंगों का भावपूर्ण एवं सजीव मंचन किया गया। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय और शानदार संवाद अदायगी ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। वहीं, रामलीला के निर्देशक श्री प्रदीप कुमार को रामलीला के प्रति 45 वर्षों की समर्पित एवं निस्वार्थ सेवा के लिए **‘जीवनकाल उपलब्धि सम्मान’** से सम्मानित किया गया।
कलाकारों के अभिनय ने बांधा समां
रामलीला के छठे दिन शूर्पणखा की भूमिका में आँचल शर्मा ने अपने प्रभावशाली अभिनय और संवाद अदायगी से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। वहीं, माता सीता की भूमिका निभाने वाली दीक्षा ने अपने सहज और भावपूर्ण अभिनय से दर्शकों को भावुक कर दिया। रावण की भूमिका में मोहित ने अपनी दमदार आवाज और प्रभावशाली व्यक्तित्व से मंच पर शानदार प्रस्तुति दी।
दिन की लीला का विशेष आकर्षण जटायु और रावण के बीच युद्ध का प्रसंग रहा। जटायु द्वारा माता सीता की रक्षा के लिए रावण से युद्ध करने के दृश्य का जीवंत मंचन देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे। पूरा रामलीला मैदान ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गूंज उठा। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से त्याग, साहस, कर्तव्य और धर्म की रक्षा का संदेश दिया।
 भव्य आयोजन और मंचन की दर्शकों ने की सराहना
रामलीला देखने पहुंचे दर्शकों ने जय श्री रामलीला मंच द्वारा किए गए आयोजन, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि प्रणाली और कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय की सराहना की। दर्शकों का कहना था कि प्रसंगों के सजीव मंचन ने उन्हें रामायण की घटनाओं से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा और भक्तिभाव का वातावरण बना रहा।
45 वर्षों की सेवा के लिए निर्देशक प्रदीप कुमार को सम्मान
इस अवसर पर रामलीला के निर्देशक श्री प्रदीप कुमार को रामलीला के प्रति पिछले 45 वर्षों से निरंतर समर्पित और निस्वार्थ सेवाएं देने के लिए ‘जीवनकाल उपलब्धि सम्मान’ प्रदान किया गया। रामलीला मंच की प्रबंध समिति और गणमान्य अतिथियों ने उन्हें शॉल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
उनकी वर्षों की साधना, कला के प्रति समर्पण और रामलीला के माध्यम से भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में दिए गए योगदान की सराहना की गई। यह सम्मान उनके लंबे सांस्कृतिक सफर और रामलीला के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि, रामलीला समिति के पदाधिकारी, गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में शहरवासी उपस्थित रहे। अंत में प्रभु श्रीराम की आरती की गई और श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद प्राप्त कर सुख-समृद्धि की कामना की।
जय श्री रामलीला मंच का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, मर्यादा और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रेरणादायक माध्यम बना।

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