आप के प्रचंड संघर्ष के आगे सत्ता के अहंकार में चूर चंडीगढ़ भाजपा के हौसले पस्त, ₹300 करोड़ से अधिक के टेबल एजेंडे वापस लेने की नौबत: विक्रांत ए. तंवर
चंडीगढ़: आप के स्टेट मीडिया इंचार्ज विक्रांत ए. तंवर ने कहा कि सत्ता के अहंकार और मनमानी में डूबी भाजपा द्वारा 300 करोड़ रुपये से अधिक के टेबल एजेंडों को अलोकतांत्रिक तरीके से और जल्दबाजी में पास करवाने के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने सड़क से लेकर सदन तक आर-पार की निर्णायक लड़ाई लड़ी। आप ने सबसे पहले इन अलोकतांत्रिक तरीके से पास किए गए टेबल एजेंडों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला और भाजपा की मनमानी को सीधी चुनौती दी। गवर्नर हाउस तक किए गए कूच के दौरान हमारी आवाज दबाने के लिए पुलिस की लाठियां चलाई गईं और वाटर कैनन की तेज बौछारें की गईं, लेकिन आप के कार्यकर्ता चंडीगढ़ की जनता के हक में चट्टान की तरह डटे रहे और सत्ता के दमन के आगे एक कदम भी पीछे नहीं हटे।
विक्रांत ए. तंवर ने कहा कि जिन 300 करोड़ रुपये से अधिक के टेबल एजेंडों को भाजपा ने अलोकतांत्रिक तरीके से, घोर जल्दबाजी और मनमानी के साथ सदन में पास करवाया था, आप ने उनके खिलाफ जोरदार संघर्ष छेड़ा और सड़क से सदन तक भाजपा की मनमानी की पोल खोल दी।
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य अटल था—टेबल एजेंडे की आड़ में चंडीगढ़ की भोली-भाली जनता की पीठ में जो छुरा घोंपा जा रहा था और जनता के साथ जो खुला धोखा किया जा रहा था, उसे हम किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। जनता के अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों के सामने आप न झुकी है, न झुकेगी। सत्ता चाहे जितना दमन करे, जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।”
तंवर ने कहा कि अब यह साफ दिखाई दे रहा है कि भाजपा की कोर कमेटी पर अपने ही फैसले के खिलाफ उठे विरोध और राजनीतिक दबाव का असर पड़ने लगा है और वे इन विवादित टेबल एजेंडों को वापस लेने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर भाजपा सच में इन टेबल एजेंडों को वापस लेती है, तो यह आप के जुझारू संघर्ष और चंडीगढ़ की अवाम की ऐतिहासिक जीत होगी। सच तो यह है कि भाजपा ने अपने ही मेयर को ठेंगा दिखा दिया है और अब अपने ही फैसले से पीछे हटने की नौबत आ गई है। जिस फैसले को भाजपा अपनी ताकत और दबदबा समझ रही थी, वही आज उसके लिए राजनीतिक किरकिरी बन गया है।”
31 जुलाई की बैठक पर जवाबदेही कौन तय करेगा?
विक्रांत ए. तंवर ने सवाल उठाते हुए कहा, “अगर अब इन प्रस्तावों को वापस लेने की बात की जा रही है, तो 31 जुलाई को सदन की विशेष बैठक बुलाने में लगा समय, सरकारी संसाधन और जनता का पैसा बर्बाद करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?”
उन्होंने कहा कि नगर निगम भाजपा के नियंत्रण में है, मेयर भाजपा के हैं और जिन प्रस्तावों पर सदन में निर्णय करवाया गया, उन पर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और पदाधिकारियों के हस्ताक्षर भी होते हैं। ऐसे में अब केवल प्रस्ताव वापस लेने से जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।
तंवर ने कहा, “हम प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों से भी सवाल पूछते हैं कि आखिर नगर निगम का सदन किस तरह चलाया जा रहा है? स्थानीय निकाय विभाग के सचिव, चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार और महामहिम राज्यपाल को भी इस पूरी कार्यप्रणाली पर गंभीरता से नजर डालनी चाहिए। क्या पहले जल्दबाजी में फैसले लिए जाएंगे, करोड़ों रुपये के प्रस्ताव पास करवाए जाएंगे, जनता और विपक्ष के सवालों को नजरअंदाज किया जाएगा और जब विरोध बढ़ेगा तो फिर उसी फैसले को वापस लेने की कवायद शुरू कर दी जाएगी?”
उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “यह तो वही बात हुई—पहले गलती करो, फिर जब शोर मचे तो आंखों में धूल झोंकने के लिए लीपापोती कर दो। लेकिन चंडीगढ़ की जनता अब इस राजनीतिक आंखों में धूल झोंकने वाले खेल को समझ चुकी है। सिर्फ टेबल एजेंडे वापस लेना काफी नहीं है; यह भी तय होना चाहिए कि इस पूरे प्रकरण में जनता के समय और पैसे की बर्बादी के लिए जवाबदेह कौन है।”
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