देश अघोषित आपातकाल की ओर बढ़ रहा है, जो सरकार अपने युवाओं से डरती है वह देश का भविष्य नहीं बना सकती : प्रो. सम्पत सिंह
चंडीगढ़ | 24 जुलाई, 2026
इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक एवं हरियाणा के पूर्व गृह मंत्री प्रो. सम्पत सिंह ने आज जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा विवाद को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह केवल छात्रों पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और देश के भविष्य पर हमला है।
प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि सरकार छात्रों के सवालों का जवाब देने की बजाय डराने और बल प्रयोग का रास्ता अपना रही है। उन्होंने कहा कि देश धीरे-धीरे अघोषित आपातकाल की ओर बढ़ रहा है। लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सुनी जाती है, उसे लाठियों से नहीं दबाया जाता।
उन्होंने कहा कि आज के युवा और छात्र देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। यदि सरकार उनकी आवाज़ को कुचलने का प्रयास करेगी तो इसका नुकसान पूरे देश को होगा। इतिहास गवाह है कि जनता की आवाज़ को ताकत के बल पर दबाने वाली सरकारें कभी सफल नहीं होतीं।
प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि एक शिक्षक होने के नाते उन्हें सबसे अधिक पीड़ा इस बात की है कि किताबें लेकर चलने वाले छात्रों का स्वागत न्याय से नहीं बल्कि बैरिकेड और लाठियों से किया गया। कोई भी छात्र अपनी पढ़ाई छोड़कर सड़क पर बैठने के लिए मजबूर नहीं होता, जब तक व्यवस्था उसे निराश न कर दे।
उन्होंने कहा कि हर पेपर लीक केवल एक परीक्षा नहीं बिगाड़ता, बल्कि लाखों छात्रों की मेहनत और उनके माता-पिता के वर्षों के त्याग और सपनों को भी तोड़ देता है। छात्र किसी प्रकार की राहत या दान नहीं मांग रहे हैं, बल्कि निष्पक्ष, पारदर्शी और पेपर लीक मुक्त परीक्षा व्यवस्था तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अपना संवैधानिक अधिकार मांग रहे हैं।
प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि जंतर-मंतर से आई लाठीचार्ज, आंसू गैस, कथित पैलेट जैसे प्रोजेक्टाइल के इस्तेमाल तथा महिला छात्रों के साथ मारपीट की खबरों ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यदि ये घटनाएं सही हैं तो यह भारतीय लोकतंत्र पर एक बड़ा कलंक है।
उन्होंने कहा कि जो सरकार अपने ही युवाओं से डरती है, वह देश का भविष्य नहीं बना सकती। छात्र अपराधी नहीं हैं, बल्कि वे केवल पारदर्शिता, निष्पक्षता और योग्यता के सम्मान की मांग कर रहे हैं।
प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि लोकतंत्र डर और दमन से नहीं चलता। सरकारें जनता की बात सुनकर विश्वास जीतती हैं, आवाज़ दबाकर नहीं। छात्रों ने देश को निराश नहीं किया है, बल्कि सरकार अपने छात्रों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही है।
इंडियन नेशनल लोकदल की मांगें:
- प्रधानमंत्री देश के छात्रों और उनके अभिभावकों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत इस्तीफा दें।
- जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई की जांच किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त हाईकोर्ट के न्यायाधीश से कराई जाए।
- जिन छात्रों की मृत्यु हुई है, उनके परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
- छात्र प्रतिनिधियों से तुरंत बातचीत शुरू की जाए।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें