**भाजपा महिला जिलाध्यक्ष पर युवती से छेड़छाड़ के आरोपी को बचाने के आरोपों की गंभीरता से जांच हो : विक्रांत ए. तंवर**
**तंवर ने भाजपा के 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' नारे को बताया निरा जुमला**
**चंडीगढ़:**
सेक्टर-39 थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक जिम में युवती के साथ कथित छेड़छाड़ और अश्लील हरकत के मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए, आम आदमी पार्टी (आप) के स्टेट मीडिया इंचार्ज विक्रांत ए. तंवर ने कहा कि यह घटना बेहद गंभीर, शर्मनाक और शहर में महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
विक्रांत ए. तंवर ने कहा कि पीड़ित युवती के पिता द्वारा भाजपा की जिला अध्यक्ष रेखा सूद पर आरोपी को बचाने के जो आरोप लगाए गए हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस से इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। तंवर ने कहा, "यदि एक महिला होते हुए भी रेखा सूद ने छेड़छाड़ के आरोपी का पक्ष लिया है, तो यह कृत्य असहनीय और घोर निंदनीय है।"
तंवर ने भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए प्रधानमंत्री मोदी के 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' के नारे को निरा जुमला करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं की कथनी और करनी का अंतर इस घटना से स्पष्ट उजागर हो गया है।
उल्लेखनीय है कि आरोपी जिम ट्रेनर पीड़ित युवती को एक्सरसाइज के बहाने जिम के उस हिस्से में ले गया, जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं थे, और वहां उसके साथ अश्लील हरकत की। पुलिस द्वारा आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना प्रथम दृष्टया मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
तंवर ने कहा कि इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि पीड़ित परिवार ने भाजपा चंडीगढ़ की जिलाध्यक्ष रेखा सूद पर आरोपी का पक्ष लेने, परिवार पर दबाव बनाने और शिकायत को कमजोर करने का आरोप लगाया है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि पूरा सच जनता के सामने आ सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति ने आरोपी को बचाने, जांच को प्रभावित करने, पीड़िता या उसके परिवार पर दबाव बनाने अथवा न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया है, तो उसके खिलाफ भी बिना किसी भेदभाव के कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
तंवर ने चंडीगढ़ पुलिस से मांग की कि इस मामले की समयबद्ध और निष्कलंक जांच सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही जिम प्रबंधन की भूमिका, वहां की सुरक्षा व्यवस्था तथा सीसीटीवी कवरेज की भी गहन जांच की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
अंत में उन्होंने जोर देते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति से ऊपर है। चंडीगढ़ की बेटियों को न्याय दिलाना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के अनुसार कठोर सजा मिलनी चाहिए। यदि कोई भी व्यक्ति न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने का दोषी पाया जाता है, तो उसे भी कानून के दायरे में लाकर सख्त सजा दी जानी चाहिए।
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