आगरा में गूंजा सामाजिक न्याय का स्वर, छत्रपति शाहूजी महाराज जयंती पर जुटे देशभर के प्रबुद्धजन



ऑल इंडिया अंबेडकर महासभा की "प्रबुद्धजन शिखर वार्ता" में संविधान, शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय पर हुआ राष्ट्रीय मंथन

आगरा (उत्तर प्रदेश), 27 जुलाई।

महान समाज सुधारक, शिक्षा के प्रबल समर्थक एवं सामाजिक न्याय के अग्रदूत छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती के उपलक्ष्य में ऑल इंडिया अंबेडकर महासभा (पंजीकृत) द्वारा यूथ हॉस्टल, संजय प्लेस, आगरा (उत्तर प्रदेश) में भव्य "प्रबुद्धजन शिखर वार्ता" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं एवं संविधान प्रेमियों ने सामाजिक न्याय, शिक्षा, समान अवसर और संवैधानिक मूल्यों पर व्यापक मंथन किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष आर. के. चौहान ने की। उन्होंने सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों, विभिन्न राज्यों से पधारे प्रबुद्धजनों एवं उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अमरीक सिंह बंगड़ ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश बहादुर रहे तथा मुख्य वक्ता राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष रीना गावस्कर वाल्मीकि थीं।

मुख्य अतिथि राकेश बहादुर ने कहा कि राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज ने शिक्षा, आरक्षण, सामाजिक समानता और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए जो ऐतिहासिक कार्य किए, वे आज भी भारतीय लोकतंत्र और संविधान की आत्मा को मजबूत करने वाले प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि यह शिखर वार्ता केवल जयंती समारोह नहीं, बल्कि संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने, सामाजिक चेतना को सशक्त करने और नई पीढ़ी को समानता, बंधुत्व एवं लोकतांत्रिक आदर्शों से जोड़ने का राष्ट्रीय अभियान है।

राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अमरीक सिंह बंगड़ ने सामाजिक संगठनों, शिक्षकों, अधिवक्ताओं, विद्यार्थियों और युवाओं से संविधान एवं सामाजिक न्याय की इस मुहिम को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता रीना गावस्कर वाल्मीकि ने अपने संबोधन में कहा कि भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान ने महिलाओं, गरीबों, दलितों, पिछड़े वर्गों और समाज के वंचित तबकों को समान अधिकार और सम्मान का आधार प्रदान किया। उन्होंने संविधान की भावना को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने पर बल दिया।

पंजाब प्रदेश अध्यक्ष निर्मलजीत सिंह तथा उपाध्यक्ष वलविंदर सिंह दोसांझ ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा संविधान में निहित समानता, न्याय और बंधुत्व के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।

चंडीगढ़ प्रदेश के प्रधान राजबीर सिंह भारतीय ने अपने संबोधन में कहा कि आज यदि भारत का प्रत्येक नागरिक स्वतंत्र वातावरण में समान अधिकारों के साथ जीवन जी रहा है, तो इसका श्रेय भारतीय संविधान और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की दूरदर्शी सोच को जाता है। उन्होंने कहा कि राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज, महात्मा ज्योतिराव फुले, माता सावित्रीबाई फुले और डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे महान समाज सुधारकों के विचारों को विद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी सामाजिक न्याय, शिक्षा और समानता के मूल्यों से प्रेरणा प्राप्त कर सके।

कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष आर. के. चौहान ने सभी अतिथियों, प्रतिनिधियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों और समतामूलक समाज के निर्माण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प दोहराया।


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