लोकतंत्र की मजबूती के लिए मजबूत विपक्ष जरूरी — दल-बदल की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता : राजबीर सिंह भारतीय
चंडीगढ़ :
समाजसेवी एवं रि. सुपरिंटेंडेंट, ऑफिस ऑफ एडवोकेट जनरल, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़, श्री राजबीर सिंह भारतीय ने देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में जाना जाता है। संविधान निर्माताओं ने ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था की कल्पना की थी जिसमें जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है और साथ ही एक मजबूत विपक्ष जनता की आवाज बनकर सत्ता से सवाल करता है।
श्री भारतीय ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश की राजनीति में जिस प्रकार राजनीतिक दलों के अंदर टूट, जनप्रतिनिधियों का दल बदलना और चुनाव के समय जिन विचारों के आधार पर जनता से समर्थन लेना तथा बाद में उन्हीं राजनीतिक समीकरणों का बदल जाना दिखाई दे रहा है, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना जैसे पुराने राजनीतिक संगठन में टूट हुई, उसके बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में विभाजन देखने को मिला। इसी प्रकार पंजाब में भी राजनीतिक बदलावों ने लोगों के बीच सवाल खड़े किए हैं। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं के दल बदलने और राजनीतिक उठापटक से वहां की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। अब महाराष्ट्र की राजनीति में दोबारा उठ रहे राजनीतिक घटनाक्रम और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को लेकर चल रही चर्चाओं ने देश की जनता का ध्यान लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती की ओर खींचा है।
श्री भारतीय ने कहा कि यह किसी एक दल या व्यक्ति का विषय नहीं है, बल्कि पूरे लोकतंत्र की संरचना से जुड़ा प्रश्न है। लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की अपनी संवैधानिक भूमिका होती है। यदि विपक्ष कमजोर होता जाएगा तो जनता की समस्याओं, सवालों और अधिकारों की आवाज को उचित मंच मिलना कठिन हो सकता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल बहुमत से सरकार बनाने का नाम नहीं है, बल्कि उसमें असहमति का सम्मान, विचारों की स्वतंत्रता और जनता के प्रति जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
श्री भारतीय ने कहा कि संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर और देश के अन्य महान नेताओं ने ऐसी व्यवस्था का सपना देखा था जिसमें जनता सर्वोच्च हो और चुने हुए प्रतिनिधि जनता के विश्वास के प्रति ईमानदार रहें।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि राजनीतिक व्यवस्था में यह भावना मजबूत होती गई कि सत्ता के साथ रहना ही सुरक्षित रास्ता है और विपक्ष की भूमिका कमजोर होती जाए, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए लोकतांत्रिक चुनौती बन सकती है।
उन्होंने कहा कि देश में मजबूत सरकार के साथ मजबूत विपक्ष भी जरूरी है, क्योंकि यही संतुलन लोकतंत्र को निरंकुश होने से बचाता है।
राजबीर सिंह भारतीय ने सभी राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से अपील की कि वे संविधान की भावना, लोकतांत्रिक परंपराओं और जनता के विश्वास को सर्वोपरि रखें, क्योंकि लोकतंत्र की असली ताकत जनता की जागरूकता और संस्थाओं की मजबूती में है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें