​हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और 'ठेका प्रथा' पर राजबीर सिंह भारतीय ने जताई चिंता; चरमराई ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग।


​चंडीगढ़:
​हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों, मूलभूत सुविधाओं के अभाव और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था पर राजबीर सिंह भारतीय (रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट, कार्यालय महाधिवक्ता, हरियाणा) ने गहरा रोष प्रकट किया है। अस्पतालों की लचर व्यवस्था और सरकार द्वारा विशेषज्ञ डॉक्टरों की 'ठेके' (कॉन्ट्रैक्ट) पर भर्ती के फैसले को उन्होंने आम जनमानस और जनहित के साथ सीधा खिलवाड़ बताया है।
​प्रेस को जारी एक बयान में भारतीय ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए:
​1. 70% ग्रामीण आबादी 'झोलाछाप' डॉक्टरों के भरोसे
भारतीय ने ग्रामीण क्षेत्रों की बेहद नाजुक स्थिति को उजागर करते हुए कहा कि भारत की 70% आबादी गांवों में बसती है, लेकिन वहां स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमराई और लचर है। जब प्रदेश के शहरों के अस्पतालों में ही डॉक्टरों और इंफ्रास्ट्रक्चर का टोटा है, तो गांवों तक सुविधाएं पहुंचना बहुत दूर की बात है। गांवों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी के कारण गरीब मरीज अप्रशिक्षित (अनस्किल्ड) स्टाफ या जिन्हें हम 'झोलाछाप डॉक्टर' कहते हैं, उनके सहारे रहने को मजबूर हैं। हकीकत तो यह है कि सरकारी विफलता के बीच इन गांवों के मरीजों को एक तरह से इन्हीं ने संभाल रखा है। सरकार को इस पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।
​2. जिम्मेदारी और जवाबदेही का प्रश्न
​उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जैसा संवेदनशील विभाग, जो सीधे तौर पर मानव जीवन से जुड़ा है, उसे 'ठेके' के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। अनुबंध पर रखे गए डॉक्टरों से वह जवाबदेही और समर्पण सुनिश्चित करना कठिन है जो एक स्थाई सरकारी डॉक्टर से अपेक्षित होती है। क्या अस्थाई डॉक्टर मरीजों के प्रति पूरी जिम्मेदारी निभा पाएंगे?
​3. उपकरण हैं, पर चलाने वाले नहीं
​अस्पतालों की दुर्दशा पर प्रहार करते हुए भारतीय ने कहा कि कई जगहों पर अल्ट्रासाउंड और अन्य आधुनिक मशीनें तो उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाले विशेषज्ञ और सपोर्टिंग स्टाफ नहीं हैं। यह प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है कि करोड़ों के उपकरण धूल फांक रहे हैं और गरीब जनता को मजबूरन निजी क्लीनिकों में जाकर अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
​4. सपोर्टिंग स्टाफ की अनदेखी
​अस्पतालों में केवल विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं, बल्कि नर्स, लैब टेक्नीशियन और अन्य सहायक स्टाफ की भी भारी कमी है। बिना पर्याप्त सपोर्टिंग स्टाफ के विशेषज्ञ डॉक्टर भी प्रभावी ढंग से अपनी सेवाएं नहीं दे सकते।
​5. आम जनमानस पर आर्थिक बोझ
​सरकारी व्यवस्था फेल होने के कारण मरीजों को दिल्ली या चंडीगढ़ के बड़े अस्पतालों की ओर भागना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश के हर जिले और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्थाई नियुक्ति होनी चाहिए ताकि गरीब मरीजों को अपने ही क्षेत्र में उचित और मुफ्त इलाज मिल सके।
​सरकार से मांग:
​राजबीर सिंह भारतीय ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि स्वास्थ्य सेवाओं में 'ठेका प्रथा' को तुरंत बंद कर स्थाई और नियमित नियुक्तियां की जाएं। इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ किया जाए और बंद पड़े मेडिकल उपकरणों को चलाने के लिए तकनीकी स्टाफ की भर्ती युद्ध स्तर पर की जाए ताकि देश की आत्मा यानी ग्रामीण जनता को इलाज के लिए दर-दर न भटकना पड़े।

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