​मौजूदा सांसद पर सवाल उठाने वालों को राजबीर सिंह भारतीय का करारा जवाब: 'संसद में गूंज रही है चंडीगढ़ की आवाज, प्रशासनिक अड़ंगों के बावजूद सांसद मनीष तिवारी धरातल पर कर रहे हैं काम


​चंडीगढ़: सांसद मनीष तिवारी के दो साल के कार्यकाल और उनके चुनावी वादों पर उंगली उठाने वाले लोगों को जमीनी हकीकत को समझना चाहिए। चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने अपने सभी चुनावी वादों और जनसमस्याओं पर गंभीरता से काम शुरू कर रखा है। विपक्ष और कुछ राजनीतिक हलकों द्वारा जिन मुद्दों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उन सभी को माननीय सांसद मनीष तिवारी ने देश की सबसे बड़ी पंचायत—लोकसभा में पुरजोर तरीके से उठाया है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन ने चंडीगढ़ के विकास से जुड़े इन जनहित के मुद्दों पर या तो नकारात्मक रवैया अपनाया या इन्हें सिरे से नकार दिया।
                                       राजबीर सिंह भारतीय

​राजबीर सिंह भारतीय ने उठाए जा रहे सवालों का बिंदुवार जवाब देते हुए स्थिति स्पष्ट की है:

​लाल डोरा, NOC और लिफ्ट के अहम मुद्दे:

सांसद ने समय-समय पर जनता के हितों को सर्वोपरि रखते हुए गांवों का लाल डोरा बढ़ाने का मुद्दा, मनीमाजरा क्षेत्र में एनओसी (NOC) की समस्या और मनीमाजरा हाउसिंग कॉम्प्लेक्स (सेक्टर 13, चंडीगढ़) में लिफ्ट लगाने का मुद्दा बेहद प्रमुखता से उठाया है। इसके अलावा भी ऐसे कितने ही जनहितैषी मुद्दे हैं जिन्हें लेकर वे लगातार प्रयासरत हैं।

​डडुमाजरा डम्पिंग ग्राउंड पर प्रशासनिक नाकामी:

डडुमाजरा डम्पिंग ग्राउंड के स्थायी निस्तारण और समाधान हेतु माननीय उच्च न्यायालय (High Court) ने भी बार-बार संबंधित अधिकारियों को कड़े आदेश दिए हैं। इसके साथ ही माननीय सांसद मनीष तिवारी ने भी इस गंभीर समस्या पर कड़ा संज्ञान लिया है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहाँ वर्तमान सरकार, स्थानीय प्रशासन और नगर निगम (Corporation) की नीयत और मंशा ही साफ नहीं लगती कि चंडीगढ़ की जनता को इस बदबूदार नर्क से हमेशा के लिए बचाया जा सके।

​24x7 पानी का फेल पायलट प्रोजेक्ट:

पानी की किल्लत पर स्थिति साफ करते हुए कहा गया कि मनीमाजरा में 24x7 पानी के पायलट प्रोजेक्ट का उद्घाटन प्रशासन ने जल्दबाजी में करवाया था, जो पूरी तरह फेल साबित हुआ है। आज जमीनी हकीकत यह है कि शहर में 24 घंटे तो दूर, लोगों को साफ और पूरे प्रेशर के साथ सामान्य पानी भी नहीं मिल पा रहा है।

​कर्मचारियों और मेट्रो का मुद्दा:

ठेका कर्मचारियों को पक्का करने के लिए सांसद तिवारी ने हर पटल पर आवाज उठाई है, लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन इन्हें नियमित नहीं कर रहा है। इसके अलावा, चंडीगढ़ में मेट्रो ट्रेन और अस्पतालों में डॉक्टरों व इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी का मुद्दा संसद में बार-बार उठाया गया, लेकिन सरकार और प्रशासन की तरफ से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया।

​सांसद निधि (MPLAD) से विकास कार्य:

सांसद मनीष तिवारी लगातार शहर की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं। चंडीगढ़ की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए भारी संख्या में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगवाए गए हैं। इसके अलावा, ग्रीन बेल्ट पार्कों का नवनिर्माण, जनता के लिए पानी के टैंकरों की उपलब्धता और गिग वर्कर्स के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाई जा रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा और सुरक्षा के मोर्चे पर सांसद पूरी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं।

​नीड बेस्ड चेंज पॉलिसी:

चंडीगढ़ में आज जो 'नीड बेस्ड चेंज पॉलिसी' (Need Based Change Policy) चल रही है, वह सांसद मनीष तिवारी द्वारा संसद में बार-बार आवाज उठाने और लगातार किए गए प्रयासों का ही सीधा नतीजा है।

​चुनावी वादों पर मंथन:

महिलाओं के खाते में सालाना 1 लाख रुपये देने के वादे पर पार्टी स्तर पर विचार चल रहा है। लेकिन जो लोग आज इस पर सवाल उठा रहे हैं, वे देश के नागरिकों के खातों में 15 लाख रुपये आने के उस पुराने वादे को भूल जाते हैं जिसका इंतजार जनता आज भी कर रही है।

​'क्षेत्र में उपस्थिति' पर उठाने वाले सवालों का जवाब:

सांसद की भूमिका पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथों लेते हुए राजबीर सिंह ने कहा कि एक सांसद का मुख्य कार्य दिल्ली में संसद और संसद सचिवालय में रहकर अपने क्षेत्र की आवाज को मजबूती से उठाना और विकास नीतियां बनवाना होता है। चूंकि चंडीगढ़ प्रशासन सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है, इसलिए स्थानीय स्तर पर फाइलों को रोकना और काम अटकाना पूरी तरह प्रशासनिक और नीतिगत खामी है।

​"सांसद मनीष तिवारी के रोजगार का वायदा करने पर हर राजबीर सिंह भारतीय ने कहा आपकी पार्टी द्वारा हर साल 2 करोड़ नौकरी देने का वादा किया था, आपका युवाओं को करोड़ों नौकरियां देने के वादे आज तक अधूरे हैं, और जब युवा अपना हक मांगते हैं तो उन्हें लाठियां मिलती हैं। जहाँ तक क्षेत्र के विकास और उपस्थिति की बात है, तो चंडीगढ़ के पिछले सांसद के 10 वर्षों के कार्यकाल और मौजूदा सांसद मनीष तिवारी के पिछले दो सालों की लोकसभा व चंडीगढ़ की हाजिरी (Attendance) का रिकॉर्ड निकाल कर देख लिया जाए; जनता को खुद साफ पता चल जाएगा कि कौन शहर के मुद्दों को लेकर कितना गंभीर है।"


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