​चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम द्वारा खुले में शौच पर ₹10,000 जुर्माने के फरमान पर जनता के सवाल: पहले सुविधा दें, फिर जुर्माना लगाएं – राजबीर सिंह भारतीय




​प्रशासन का तुगलकी फरमान: ₹10,000 जुर्माना मंजूर, लेकिन पहले शौचालय तो दें! – राजबीर सिंह भारतीय

​चंडीगढ़:

​चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम द्वारा हाल ही में जारी उस नोटिफिकेशन पर शहर के निवासियों और समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने कड़ा ऐतराज जताया है, जिसमें खुले में शौच या पेशाब करने पर ₹10,000 के भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान किया गया है। मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने प्रशासन के इस निर्णय को धरातल की सच्चाइयों से परे बताया है।

​राजबीर सिंह भारतीय ने प्रशासन से अनुरोध करते  हुए कहा कि जुर्माना लगाना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है। "सिटी ब्यूटीफुल" कहलाने वाले चंडीगढ़ में पार्कों, सड़कों के किनारे और विशेषकर कॉलोनियों में स्थित शौचालयों की स्थिति दयनीय है। अधिकांश पार्कों के वॉशरूम में ताले लटके रहते हैं और यदि कहीं खुले भी हैं, तो वहां सफाई व्यवस्था चरमराई हुई होती है।

​महिलाओं के साथ भेदभाव और अवैध वसूली का मुद्दा:

​इस मुद्दे पर महिलाओं का पक्ष रखते हुए सुभाष नगर की समाजसेवी कमलेश देवी व अन्य महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक शौचालयों में महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अक्सर जब भी कोई महिला शौचालय का उपयोग करने जाती है, तो वहां तैनात कर्मचारी उनसे पैसों की मांग करते हैं, जबकि पुरुषों से यह वसूली नहीं की जाती। पैसे न देने पर कर्मचारी दुर्व्यवहार करते हैं, मुंह बनाते हैं या बहस पर उतारू हो जाते हैं। प्रशासन को जवाब देना चाहिए कि एक तरफ तो सुविधाएं नगण्य हैं, और दूसरी तरफ महिलाओं से इस तरह का भेदभाव और अवैध वसूली क्यों की जा रही है?

​प्रैस नोट के मुख्य बिंदु:

​सुविधा का अभाव: मनीमाजरा और इंदिरा कॉलोनी तथा सिटी ब्युटीफुल की दुसरी कालोनी व घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सार्वजनिक शौचालयों की भारी कमी है। जैसे इंदिरा कॉलोनी की बूथ मार्केट के दुकानदार और स्थानीय निवासी वर्षों से शौचालय की मांग कर रहे हैं, जिसे हमेशा से अनसुना किया गया है।

​सड़कों पर शौचालय नहीं: भीड़भाड़ वाले मनीमाजरा माड़ीवाला टाउन से सुभाष नगर व इंदिरा कालोनी होकर माता मनसा देवी रोड तक राहगीरों के लिए कोई सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इस मार्ग पर कम से कम 2-3 शौचालयों का होना अनिवार्य है।

​गरीब बस्तियों की अनदेखी: झुग्गी-झोपड़ी और कॉलोनियों में हजारों की आबादी के लिए नगर निगम ने कोई ठोस व्यवस्था नहीं की है। व्यवस्था जहां है वहाँ सफाई/ हाईजैनिक विवशता में ही लोग खुले का रुख करते हैं।

​टैक्स का उचित उपयोग हो: जनता करोड़ों रुपये टैक्स देती है। उनका हक है कि उन्हें 24x7 खुले रहने वाले और साफ-सुथरे सार्वजनिक शौचालय मिलें।

​राजबीर सिंह भारतीय और कमलेश देवी ने संयुक्त रूप से प्रशासन व कार्पोरेशन से कहा कि हम गंदगी फैलाने का समर्थन नहीं करते, लेकिन बिना उचित ढांचा तैयार किए और बिना भेदभाव मुक्त व्यवस्था सुनिश्चित किए भारी जुर्माना थोपना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने मांग की कि इंदिरा कॉलोनी सुभाष नगर व मनीमाजरा के अन्य हिस्सों में नए सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएं और शौचालयों में महिलाओं से होने वाली अवैध वसूली पर तुरंत लगाम लगाई जाए।

​प्रशासन से अपील है करते हैं कि हम गंदगी फैलाने का समर्थन नहीं करते परन्तु प्रशासन केवल कागजी फरमान जारी करने के बजाय धरातल पर उतरकर 'जनता-जनार्दन' की आवाज़ सुने। पहले सुविधाएं दुरुस्त करें, फिर दंडात्मक कार्रवाई की बात करें।


​भवदीय,

​राजबीर सिंह भारतीय
समाजसेवी एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष,
मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन, चंडीगढ़।

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