प्रोग्रेसिव फ्रंट पंजाब' ने राज्य की लगभग 55 हजार अवैध कॉलोनियों को नियमित करने और पेरिफेरी कंट्रोल एक्ट 1952 को रद्द करने संबंधी मांग पत्र मुख्यमंत्री पंजाब को भेजा



मांग पत्र में पंजाब के 12,894 गांवों के लाल डोरे के अंदर और बाहर रहने वाले लगभग दो करोड़ निवासियों को तत्काल राहत देने की मांग की गई

फ्रंट के नेताओं ने कहा कि आज भ्रष्ट अधिकारियों के लिए NOC का मतलब "न्यू ऑप्शन फॉर करप्शन" बन गया है

मोहाली, 19 जून: आज यहां प्रोग्रेसिव फ्रंट पंजाब की ओर से मुख्यमंत्री पंजाब श्री भगवंत सिंह मान को एक मांग पत्र भेजा गया, जिसमें मांग की गई कि राज्य में मौजूद लगभग 55 हजार कथित अवैध कॉलोनियों को बिना किसी शर्त के तुरंत नियमित किया जाए तथा पंजाब न्यू कैपिटल पेरिफेरी कंट्रोल एक्ट, 1952 को रद्द कर मोहाली और रूपनगर जिलों के लोगों को राहत दी जाए।

इस संबंध में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए फ्रंट के चेयरमैन एडवोकेट दर्शन सिंह धालीवाल, अध्यक्ष हरमिंदर सिंह मावी, महासचिव सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर महिंदर सिंह मनौली सूरत, डॉ. दलजीत सिंह कैलो तथा श्री रजनीश खन्ना ने कहा कि इन कॉलोनियों का निर्माण पिछले 25-30 वर्षों से हुआ है। सरकार द्वारा इनकी रजिस्ट्रियां भी की गई हैं तथा बिजली और पानी के कनेक्शन भी दिए गए हैं। यहां रहने वाले लोगों ने बैंकों से ऋण लेकर मकान बनाए हैं और उनकी किश्तें भी चुका रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गांवों की बढ़ती आबादी के कारण बड़ी संख्या में लोग गांवों की लाल रेखा (लाल डोरा) से बाहर भी रह रहे हैं। इनकी संख्या लगभग 1 करोड़ 90 लाख है तथा परिवारों की संख्या करीब 38 लाख है। पिछले 25-30 वर्षों में किसी भी सरकार ने इन लोगों की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया। वर्तमान सरकार ने इन कॉलोनियों और गांवों की लाल रेखा से बाहर स्थित प्लॉटों और मकानों की रजिस्ट्रियां बंद कर रखी हैं, जिससे लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं और भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

नेताओं ने कहा कि सरकार की इस नीति के कारण जहां सरकारी राजस्व में करोड़ों रुपये की कमी आई है, वहीं लाखों लोग बेरोजगार भी हो गए हैं। एक कनाल से कम क्षेत्रफल वाली जमीनों की रजिस्ट्रियों पर रोक लगाकर पंजाब के लोगों के साथ अन्याय किया जा रहा है। गांवों की लाल रेखा के अंदर स्थित प्लॉटों की रजिस्ट्रियां भी नहीं की जा रही हैं। सरकार के इस कदम ने सरकारी अधिकारियों के लिए रिश्वतखोरी के नए रास्ते खोल दिए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि मोहाली शहर के आसपास किसानों और भूमि मालिकों को अपनी जमीन पर शेड बनाकर किराये पर देने या स्वयं उपयोग करने से रोका जा रहा है। इससे उनकी आय प्रभावित हो रही है और यह उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। सरकार को इस संबंध में तुरंत जनहित में आदेश जारी करने चाहिए।

फ्रंट के नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य की नौकरशाही जानबूझकर इस विषय पर जटिल नीतियां बनाती है ताकि भ्रष्टाचार जारी रहे और आम लोगों से करोड़ों रुपये की वसूली की जा सके। उन्होंने कहा कि कई कॉलोनियों में सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की ग्रांट भी दी गई है और राज्य के लगभग 50 प्रतिशत राजनेता तथा अधिकारी भी इन कॉलोनियों में रहते हैं। जिन अधिकारियों ने पहले इन संपत्तियों की रजिस्ट्रियां की थीं, वही अब विभिन्न प्रकार की पाबंदियां लगाकर लोगों को परेशान कर रहे हैं।

उन्होंने मांग की कि मोहाली शहर के अंतर्गत आने वाले गांवों में लोगों को अपने प्लॉटों पर 55 फुट तक निर्माण की अनुमति दी जाए तथा गांवों की लाल रेखा को 500 मीटर तक बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण लाखों मजदूर, राजमिस्त्री, रेत-बजरी और ईंट कारोबार से जुड़े लोग, पेंटर, इलेक्ट्रिशियन आदि बेरोजगार हो गए हैं और उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

नेताओं ने कहा कि सरकार ने आज तक शहरों और उनके आसपास रहने वाले गरीब एवं निम्न-मध्यम आय वर्ग के लोगों, जिनकी मासिक आय 10 हजार से 50 हजार रुपये के बीच है, के लिए कोई प्रभावी आवास नीति नहीं बनाई है।

फ्रंट ने मुख्यमंत्री से अपील की कि इन कॉलोनियों में NOC की शर्त को तुरंत समाप्त किया जाए क्योंकि NOC का मतलब अब "न्यू ऑप्शन फॉर करप्शन" बन गया है। साथ ही मुख्यमंत्री से यह भी अनुरोध किया गया कि इस मामले में नौकरशाही की सलाह पर आंख मूंदकर भरोसा न किया जाए और कोई भ्रम पैदा करने वाली नीति लागू न की जाए।

फ्रंट ने राज्य के सभी विधायकों, विपक्षी राजनीतिक दलों, किसान संगठनों, मजदूर संगठनों, व्यापारियों, वकीलों तथा सामाजिक और धार्मिक संगठनों से भी अपील की कि वे इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाएं और सरकार पर दबाव बनाएं, ताकि राज्य के लगभग 60 प्रतिशत निवासियों को राहत मिल सके।

नेताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की नगर निगमों और नगर परिषदों में रिश्वतखोरी चरम पर है और इस पर तुरंत अंकुश लगाया जाना चाहिए।

इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए एडवोकेट दर्शन सिंह धालीवाल ने बताया कि मांग पत्र की प्रतियां राजस्व मंत्री, आवास मंत्री, स्थानीय निकाय मंत्री, मुख्य सचिव, वित्त आयुक्त तथा पुडा/गमाडा के मुख्य प्रशासक को भी भेजी गई हैं। इसके अलावा राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियों के अध्यक्षों को भी यह मांग पत्र भेजा गया है।


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