*अटल जन्म शताब्दी पर शब्दों से सजा राष्ट्रभाव, भाजपा चंडीगढ़ कार्यालय में भावविभोर कवि सम्मेलन*
भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में भारतीय जनता पार्टी चंडीगढ़ प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र पाल मल्होत्रा के नेतृत्व में एक भव्य एवं प्रेरणादायी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कवि सम्मेलन भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई को पूर्ण रूप से समर्पित रहा, जिसमें कविता, विचार और राष्ट्रभाव का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र पाल मल्होत्रा एवं उपस्थित प्रदेश पदाधिकारियों द्वारा सभी आमंत्रित कवियों एवं कवित्रियों को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
कवि सम्मेलन में चंडीगढ़ के प्रसिद्ध कवियों एवं कवित्रियों ने भाग लिया और अपनी कविताओं के माध्यम से अटल बिहारी वाजपेई की एक महान कवि, विचारक और राष्ट्रनायक की छवि को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। कविताओं में अटल का देश के प्रति समर्पण, त्याग, संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों के प्रति आस्था और राष्ट्रहित के लिए अडिग संकल्प स्पष्ट रूप से झलकता रहा।
कार्यक्रम का प्रभावशाली मंच संचालन कवि डॉ. मनीष गर्ग ने किया, जिन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी और भावपूर्ण प्रस्तुति से पूरे सभागार को भाव-विभोर कर दिया। श्रोतागण हर कविता के साथ अटल के विचारों और व्यक्तित्व से और अधिक जुड़ते चले गए।
कवियत्री नंदिनी ने अपनी देशभक्ति से ओत-प्रोत कविता —
“गुरु गोविंद सिंह, वीर शिवाजी और महाराणा की तलवार बनो तुम,
राम खड़ाऊ सर पर धरकर राज चलाएं, ऐसे भ्रातृ प्रेम के भरत बनो तुम” —
के माध्यम से राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना को स्वर दिया।
कवि डॉ. अश्वनी शांडिल्य ने अटल की राजनीतिक शुचिता और मानवीय गरिमा को रेखांकित करते हुए कविता प्रस्तुत की —
“राजनीति के कीचड़ का एक कमल तुम्हें दिखलाता हूं,
अटल बिहारी महामानव की गरिमा गीत सुनाता हूं।”
डॉ. अनीश गर्ग ने अटल से प्रेरणा लेते हुए भावपूर्ण पंक्तियां प्रस्तुत कीं —
“काश! मैं भी अटल बन जाऊं…
कलम से निकले तो इंकलाब निकले,
मैं शौर्य की दहकती ग़ज़ल बन जाऊं।”
सर्वेश शायर की पंक्तियां —
“बेहद भी हूं मैं खुद में और हद भी जानता हूं,
पाने की उसे जिद है और जद भी जानता हूं” —
ने आत्मविश्वास और संकल्प की भावना को सशक्त रूप में व्यक्त किया।
कवियत्री अनीता गरेजा ने रणभूमि और राष्ट्रशक्ति का चित्र खींचते हुए कहा —
“रणभेरी की गूंज, धरा कांप उठी, गगन गरजा,
जब भारत-पुत्र रण में उतरा।”
राजेश आत्रेय ने प्रेम, सद्भाव और मानवीय मूल्यों का संदेश देते हुए कविता प्रस्तुत की, वहीं कवि लविश चावला ने अटल की स्मृति में मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को स्वर दिया। कवि अशोक भंडारी नादिर ने राष्ट्र के प्रति दृढ़ संकल्प और स्पष्ट लक्ष्य की बात अपनी पंक्तियों में रखी।
यह कवि सम्मेलन केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं था, बल्कि अटल बिहारी वाजपेई के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बना। अटल का जीवन यह सिखाता है कि राजनीति में भी कविता की कोमलता, विचारों की दृढ़ता और राष्ट्र के प्रति निःस्वार्थ समर्पण संभव है। यह आयोजन अटल के विचारों को जीवित रखने और उन्हें जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक प्रेरक कदम सिद्ध हुआ।
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