“संविधान बचाओ” की बात वही कर रहे हैं जिन्होंने सबसे पहले उसे कुचला था – संजीव राणा,,,,,आपातकाल थोपने वालों से लोकतंत्र और संविधान की बात सुनना जनता का अपमान है।



चंडीगढ़ कांग्रेस द्वारा केंद्र सरकार और भाजपा पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से भ्रामक, झूठे और राजनैतिक अवसरवाद से प्रेरित हैं। कांग्रेस आज “संविधान बचाओ” की बात कर रही है, जबकि 1975 में उसी पार्टी ने न्यायपालिका के फैसले के विरोध में आपातकाल थोपकर लोकतंत्र को कुचल डाला था।

12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जगमोहन सिन्हा ने इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द किया और छह साल तक अयोग्य घोषित किया। इसके जवाब में कांग्रेस ने संविधान को ताक पर रखकर तानाशाही थोपी। आज वही पार्टी लोकतंत्र की दुहाई दे रही है, यह खुद एक मज़ाक है।

चंडीगढ़ कांग्रेस जिस तरह प्रशासन, कर प्रणाली और बजट को लेकर झूठ फैला रही है, वह पूरी तरह से राजनैतिक अवसरवाद है। पिछले साल निगम को 570 करोड़ और इस साल 675 करोड़ रुपए की ग्रांट दी गई है, लेकिन कांग्रेस यह भूल जाती है कि जब वे सत्ता में थे, तब शहर के विकास के लिए न कोई योजना थी और न ही कोई ईमानदारी।

मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि भारतीय जनता पार्टी सिर्फ़ और सिर्फ़ जनता के साथ है – न अफसरशाही के साथ, न स्वार्थी राजनीति के साथ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन कुमार बंसल सालों तक यही रोते रहे कि “अफसर मेरी नहीं सुनते।” फर्क बस इतना है कि कांग्रेस अफसरों से अपनी कुर्सी की राजनीति करना चाहती थी, जबकि भाजपा हमेशा जनता की आवाज़ बनकर प्रशासन के सामने खड़ी रही है।

जो अधिकारी जनता के खिलाफ काम करेंगे, भाजपा सबसे पहले उनका विरोध करेगी। भाजपा के पार्षदों ने हमेशा जनता के हित में सवाल उठाए हैं, चाहे वो संपत्ति कर में पारदर्शिता की माँग हो या अन्य मुद्दे।

कांग्रेस की कथनी और करनी में फर्क अब किसी से छुपा नहीं है। कांग्रेस की पूरी राजनीति सिर्फ़ अफवाह, झूठ और भावनात्मक शोषण पर आधारित रही है, जबकि भाजपा विकास, पारदर्शिता और जनहित के लिए लगातार काम कर रही है।

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