जीरकपुर नगर परिषद में कर्मचारियों व अधिकारियों का टोटा, चार लाख से पार हुई जीरकपुर की जनसंख्या, सबसे कम हैं नियमित कर्मचारी, एक ईओ व एक बिल्डिंग इंस्पेक्टर पर है बोझ.....


जीरकपुर। पंजाब सरकार के राजस्व में सर्वाधिक योगदान देने वाली जीरकपुर नगर परिषद में कर्मचारियों व अधिकारियों की भारी कमी है। जिसका खामियाजा यहां की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। 
जैक रैजीडेंटस वैलफेयर एसोसिएशन के प्रधान सुखदेव चौधरी नगर परिषद में कर्मचारियों के अभाव का मुद्दा स्थानीय निकाय मंत्री इंद्रबीर सिंह निज्जर के समक्ष उठाया है।
जैक प्रधान सुखदेव चौधरी ने बताया कि जीरकपुर की जनसंख्या चार लाख से पार हो चुकी है। जीरकपुर के माध्यम से पंजाब सरकार के खजाने में हर माह लाखों रुपये का राजस्व जा रहा है। इसके बावजूद यहां वर्तमान में केवल एक कार्यकारी अधिकारी को तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि यहां एक बिल्डिंग इंस्पेक्टर, एक एसडीओ है । कोई भी रेगुलर एम इ ना होने की वजह से काम बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि जीरकपुर रियल एस्टेट के क्षेत्र में इस समय पंजाब का हब बन चुका है। यहां आए दिन नई-नई सोसायटियां आ रही हैं। ऐसे में नगर परिषद में इन पदों पर एक-एक अधिकारी की तैनाती से लोगों को ढेरों परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इनमें से अगर कोई अधिकारी किसी काम से छुट्टी पर चला जाए तो पीछे से फाइलों के ढेर लग जाते हैं।
अधिकारियों के अलावा कर्मचारियों के ग्रुप सी के पदों पर भी यहां यही हाल है। ज्यादातर पदों पर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बिठाया गया है। नियमित कर्मचारियों की संख्या बहुत कम है।

और बढ़ सकता है राजस्व, रूकेंगे अवैध निर्माण..... 
जैक प्रधान सुखदेव चौधरी ने कहा कि अगर यहां अतिरिक्त कर्मचारी व अधिकारी तैनात किए जाएं तो पंजाब सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा वर्षों से एक ही पद पर तैनात अथवा बार-बार यहीं पोस्टिंग करवाकर सरकार को चूना लगाने वाले अधिकारियों पर भी नकेल कसी जा सकती है।
         
शहर में हर तरफ फैली है अव्यवस्था..... 
जैक प्रधान सुखदेव चौधरी ने बताया कि नगर परिषद के ईओ व अन्य अधिकारियों को फील्ड में गए कई-कई दिन बीत जाते हैं। बिल्डर लॉबी के लिए काम कर रही नगर परिषद के पास आम जनता के लिए समय नहीं है। आज शहर के हालात यह हैं कि यहां हर तरफ गंदगी के ढेर फैले हुए हैं। सीवर ओवरफ्लो हो रहे हैं। लावारिस पशु हादसों का कारण बन रहे हैं। जनता की इन समस्याओं के समाधान के लिए परिषद के अधिकारियों के पास फील्ड में जाकर देखने के लिए समय नहीं है।

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