एक साल बाद भी नहीं बदले हालात---चुनावी घोषणा साबित हुआ जीरकपुर में अस्पताल निर्माण, न डाक्टरों की तैनाती, न उपकरण, न सीएचसी का नाम बदला,पंजाब में बदली सरकार क्या अब बदल सकते हैं जीरकपुर के हालात, जैक ने स्वास्थ्य मंत्री विजय सिंगला से मुलाकात को मांगा समय,,लगातार चल रहा है हस्ताक्षर अभियान
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जीरकपुर। पंजाब सरकार द्वारा जीरकपुर में सौ बिस्तरों के अस्पताल का निर्माण करने की घोषणा के एक साल दो माह बाद भी हालात नहीं बदले हैं। सीएचसी को अपग्रेड करके अस्पताल में तबदील करने का ऐलान करके लोगों को गुमराह करने वाली कांग्रेस के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिद्धू और हलका इंचार्ज दीपेंद्र ढिल्लों को झूठी घोषणाएं करने के चक्कर में लोगों ने घर बिठा दिया है।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलवीर सिद्धू तथा कांग्रेस के स्वयंभू हलका इंचार्ज रहे दीपेंद्र ढिल्लों पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए ज्वाइंट एक्शन कमेटी (जैक) के प्रतिनिधियों ने जनता की जुड़ी समस्या के समाधान हेतु पंजाब के मौजूदा स्वास्थ्य मंत्री विजय सिंगला से मुलाकात के समय मांगा है।
जैक रैजीडेंटस वैलफेयर एसोसिएशन के प्रधान सुखदेव चौधरी, महासचिव एडवोकेट विनय कुमार, एडवोकेट इंदर सेठी ने कांग्रेस पर जीरकपुर में अस्पताल निर्माण के नाम शहर वासियों के साथ धोखा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 4 जनवरी 2021 को कांग्रेस के हलका इंचार्ज दीपेंद्र ढिल्लों तथा तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बलवीर सिद्धू ने शहर के हजारों लोगों को गुमराह करते हुए यहां ढकौली में सीएचसी को अपग्रेड करने का ऐलान कर दिया था।
जैक द्वारा यह मुद्दा लंबे समय से उठाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस की यह घोषणाएं कागजी साबित हुई हैं। पंजाब में सरकार बदल चुकी है लेकिन ढकौली सीएचसी के हालात नहीं बदले हैं। सुखदेव चौधरी ने कहा कि यहां आजतक न तो सौ बिस्तरों के अस्पताल के अनुसार बुनियादी ढांचा विकसित किया गया है और न ही प्र्याप्त संख्या में डाक्टरों की तैनाती की गई है। हालात यह हैं कि आजतक बोर्ड भी नहीं बदला गया है। चार लाख की संख्या वाले जीरकपुर में अस्पताल के लिए बहुत बड़ी जगह चाहिए।
सुखदेव चौधरी ने कहा कि क्षेत्र वासियों की इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने पंजाब के नए बने स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात के लिए समय मांगा है। स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात करके उन्हें यहां की असल स्थिति से अवगत कराया जाएगा। सुखदेव चौधरी ने कहा कि जीरकपुर भले ही विकसित हो गया है लेकिन यहां के लोग आज भी इमरजेंसी के हालात में पंचकूला या चंडीगढ़ के अस्पतालों पर निर्भर हैं।
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