एनके शर्मा की शख्सियत आज भी उतनी ही मजबूत, हैट्रिक नहीं कर पाए लेकिन टूटने का सवाल ही नहीं, डेराबस्सी के दिग्गज नेताओं में एनके शर्मा का नाम हमेशा रहेगा शामिल
शनाया चौहान: जीरकपुर
पंजाब विधानसभा 2022 के चुनावों में जो रिजल्ट देखने को मिला है ,उसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि अकाली दल और कांग्रेस पूरी तरह से पंजाब से खत्म हो गई है और अब आने वाले 15 से 20 साल तक पंजाब में हो सकता है आम आदमी पार्टी का ही परचम लहराता रहे ।फिलहाल हम अगर बात करें हल्का डेराबस्सी की तो हलका डेराबस्सी से आम आदमी पार्टी के कुलजीत सिंह रंधावा ने भारी मतों से जीत हासिल कर एक कीर्तिमान रच दिया है ।कुलजीत सिंह रंधावा ने कांग्रेस प्रत्याशी सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों को हराया है और यह सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों की लगातार पांचवीं हार है ।कुलजीत सिंह रंधावा की जीत से ज्यादा लोगों ने सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों की हार के बारे में बात की है ।वहीं दूसरी तरफ हल्का डेराबस्सी के दिग्गज एन के शर्मा अकाली दल की सबसे मजबूत उम्मीदवार थे, जिन्होंने लगातार सिर्फ जीत का ही चेहरा देखा था। हार का मुंह तो उन्हें कभी देखना ही नहीं पड़ा। लेकिन पिछले कुछ वक्त से उनके अच्छे समय के पहिए ने उल्टी चाल चलना शुरू कर दिया था, जिसके चलते एनके शर्मा को तीनों नगर कौंसिल से भी हार का सामना करना पड़ा था और इस बार उन्हें उम्मीद थी कि विधानसभा चुनावों में तो वह हैट्रिक लगा ही देंगे। एनके शर्मा को अपनी जीत का पूरा भरोसा था। वही उनके समर्थकों को भी उनकी हैट्रिक का इंतजार था लेकिन नगर परिषद के चुनावों के बाद उनकी किस्मत का पहिया फिर से उल्टी चाल चल गया और एन के शर्मा को इस तरह की हार का सामना करना पड़ा कि वह पहले स्थान से खिसक कर सीधा तीसरे स्थान पर आ गए। सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों जो आज तक एन के शर्मा से हारते आए हैं, उन्होंने एनके शर्मा को इस बार 582 वोटों से पीछे धकेल दिया ।इसे कहीं ना कहीं अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर कुलजीत सिंह रंधावा जैसा मजबूत दावेदार चुनावी मैदान में ना होता तो इस चुनावी पिच पर हैट्रिक लगाने के आदी एनके शर्मा को सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों की बॉल के आगे क्लीन बोल्ड होना ही पड़ता और सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों आज विधायक पद पर विराजमान होते, लेकिन बाजी मार ले गए, आम आदमी पार्टी के कुलजीत सिंह रंधावा।
अब जिस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि एनके शर्मा की इस हार से एनके शर्मा चारों तरफ से खत्म हो गए हैं। अब ना कोई भी नगर परिषद उनके पास है, न ही वह विधायक पद के सिंहासन पर विराजमान हैं। एनके शर्मा की हार से लोगों को उनके राजनीतिक सफर का अंत दिखाई दे रहा है लेकिन कहीं ना कहीं यह अंदाजा गलत साबित हो सकता है ।क्योंकि एन के शर्मा सिर्फ एक पूर्व विधायक ही नहीं एक ऐसे दिग्गज नेता हैं जो राजनीति के पुराने माहिर हैं और बहुत मजबूत नेता भी हैं। एनके शर्मा को तोड़ना इतना आसान नहीं है। चुनावी पिच पर भले से उनका सिक्सर ना लगा हो लेकिन वह इस खेल के पुराने खिलाड़ी हैं। आज भी एनके शर्मा की शख्सियत उतनी ही मजबूत नजर आ रही है जितनी चुनाव से पहले या चुनावी दौर में दिखाई दे रही थी। एन के शर्मा को हार का अफसोस तो जरूर होगा लेकिन उनके जैसे दिग्गज नेताओं को अगर जीतना आता है तो हार का सामना भी मजबूती से करना आता है। एनके शर्मा आज भी डेराबस्सी के दिग्गज नेताओं की श्रेणी में सबसे आगे हैं । उनके राजनीतिक सफर की मेहनत हल्का डेराबस्सी के इतिहास ने देखी है।
हार और जीत होना एक किस्मत का खेल है , जनता का एक फरमान है, लेकिन सिर्फ हार और जीत के आंकड़े देख कर दिग्गज नेताओं की मजबूत शख्सियत को टूटा हुआ समझना कहीं ना कहीं एक नासमझी भरा अंदाजा है।
अब सवाल यह उठता है कि इस बार एनके शर्मा को हार का सामना देखना क्यों पड़ा, क्योंकि लगातार जनता द्वारा उन्हें ही विधायक पद का सिहासन सौंपा जाता था। पर इस बार जनता ने यह सिहासन उनसे क्यों छीन लिया???? अगर शर्मा की हार की सबसे बड़ी कोई वजह रही है तो वह वजह है बीजेपी से उनका गठबंधन टूट जाना। जिसे खुद कहीं ना कहीं एनके शर्मा ने भी माना है । आज भी अगर आंकड़े उठाकर देखे जाए तो सीधे तौर पर जाहिर होता है कि अगर बीजेपी से एनके शर्मा का आज भी गठबंधन होता तो एनके शर्मा की हैट्रिक होने से कोई नहीं रोक सकता था। दूसरी सबसे बड़ी वजह रही है कि इस बार जनता बदलाव चाहती थी क्योंकि यह बात जनता द्वारा आम आदमी पार्टी को पूर्ण बहुमत दिए जाने से साबित हो गई है ।चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बीजेपी, और अकाली दल सभी ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। सभी ने एक दूसरे पर कीचड़ उछाली और सभी ने एक दूसरे के विकास कार्यों और निजी विकास पर सवाल उठाए लेकिन इस तरह के आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला तो हर एक चुनाव में देखने को मिलता ही है और इन्हीं चीजों को चुनावी दौर कहा जाता है। इस बार जनता ने कांग्रेस और अकाली दल के आरोप-प्रत्यारोप को पहचान कर आम आदमी पार्टी को मौका दे दिया।
लेकिन अगर आंकड़े उठाकर देखें जाए तो एनके शर्मा ने ना सिर्फ मोहाली में बल्कि पटियाला लोकसभा के 9 हलकों में भी सबसे अव्वल प्रदर्शन दिया है। डेराबस्सी में अकाली और बसपा बसपा ने सबसे ज्यादा 23.92 फ़ीसदी वोट शेयर हासिल किया है।
चुनाव नतीजे भले से एन के शर्मा के पक्ष में न गए हो लेकिन आज भी एनके शर्मा दिग्गज नेताओं में शामिल है । जैसा कि हमने देखा है कि सचिन तेंदुलकर आज क्रिकेट पिच पर क्रिकेट नहीं खेलते और कभी-कभी सचिन भी जीरो पर आउट हो जाते थे लेकिन आज भी सचिन का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है, इसी तरह हल्का डेराबस्सी राजनीति पिच में भले से एन के शर्मा आज रन आउट हो गए हैं लेकिन राजनीति रूपी बैट कितनी मजबूती से पकड़ना है और किधर घुमाना है, आज भी एनके शर्मा को आता है।
Sharma ji Zindabaad Zindabad Zindabad Always Zindabaad
जवाब देंहटाएंOur Great leader
V r proud