सरदार दीपिंदर सिंह ढिल्लों एक शिक्षित नेता हलके को जरूरत है शिक्षित नेता की



शनाया चौहान :जीरकपुर
भारत में लोकतंत्र है, जिसके चलते सभी को समान अवसर प्राप्त हैं। 
भारत एक ऐसा देश है, जहां पर अगर पढ़े लिखे नेता दिखाई देते हैं तो वहीं कुछ नेता ऐसे भी हैं जो पढ़ाई के मामले में काफी पिछड़े हुए होते हैं ।लेकिन एक अहम सवाल यहां यह है कि क्या भारत को ऐसे नेताओं की जरूरत है, जो पढ़ाई के मामले में पिछड़े हुए हैं और देश को बदलने की हुंकार भरते दिखाई देते हैं या फिर नेता ऐसा होना चाहिए जो शिक्षित हो, क्योंकि शिक्षा एक ऐसा हथियार है, जिसके बलबूते इंसान अच्छे बुरे का ज्ञानी हो जाता है और अगर एक नेता पढ़ा-लिखा अनुभवी हो तो उसे पता रहता है कि देश को कैसे चलाना चाहिए और देश की तरक्की किस तरह से की जा सकती है। आज हम बात करते हैं सिर्फ हलका डेराबस्सी की ।
हलका डेराबस्सी में सभी राजनीतिक दलों के नेता मौजूद हैं। हर नेता की अपनी एक प्रतिभा है। हर नेता अपने आप में संपूर्ण हैं और हर नेता किसी ना किसी तरह लोगों के दिल पर छाया हुआ है। अगर बात कीजिए कांग्रेस प्रत्याशी सरदार दीपिंदर सिंह ढिल्लों की तो सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों एक बेहद शिक्षित और समझदार उम्मीदवार के तौर पर इस वक्त हलके में सबसे ऊंचाई पर हैं। 
सरदार दीपिंदर सिंह ढिल्लों एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जहां पर न्याय की मूर्ति विराजमान होती है।  सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों के परिवार में आपको बता दें कि सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों का परिवार कानूनी पढ़ाई से जुड़ा हुआ है। ना सिर्फ सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों बल्कि उनके पिताजी भी कानून के रखवाले रह चुके हैं। 
कानूनी पढ़ाई कर चुके सरदार दीपिंदर सिंह ढिल्लों को कानून की पूरी समझ है। जब किसी भी चुनाव में उम्मीदवार चुना जाता है तो उसकी पढ़ाई उस इलाके का बेहतर विकास कर सकती है, जिस इलाके से उसने जीत हासिल की है और यह बहुत जरूरी हो जाता है हर एक उम्मीदवार के लिए कि वह एक पढ़ा-लिखा और शिक्षित व्यक्ति हो, क्योंकि व्यक्ति जितना ज्यादा पढ़ा लिखा होगा उसकी समझ उतनी ही ज्यादा होगी और कानून के दायरे में रहते हुए वह अपने हलके का विकास कार्य बेहतरीन तरीके से कर सकता है। शिक्षा के बिना उम्मीदवार का जीतना आगे चलकर कहीं ना कहीं विकास कार्य में बाधा बन जाता है। उम्मीदवार जितना ज्यादा पढ़ा-लिखा होगा, उसे उतना ज्यादा पता होगा कि हलके में किस नियम के तहत कौन सा विकास कार्य कराया जा सकता है। यह सारी समझ एक उम्मीदवार के पास होना बहुत जरूरी है । तभी हर एक हलके का विकास होगा और हर एक हलका मिलकर एक राज्य का विकास होगा और हर एक राज्य मिलकर भारत देश का विकास होगा। 
अब यह जनता को तय करना है कि एक शिक्षित, अनुभवी और समझदार उम्मीदवार को जीता कर आने वाले वक्त को सुनहरे पलों में बदलना है या फिर सिर्फ चेहरा देखकर उम्मीदवार को जीताना है। यह हक जनता का है कि जनता किसे चुनकर लाती है और किस के सर पर जीत का सेहरा बांधती है। 
आने वाले विधानसभा चुनावों में एक इतिहास तो लिखा जाएगा लेकिन यह इतिहास सुनहरा लिखना जनता के हाथ में है। इतिहास की कलम जनता के हाथ में है और जनता इस वक्त कैसा उम्मीदवार चाहती है, यह जनता के ऊपर निर्भर करता है ।लेकिन अंत में यही कहेंगे कि कोई भी उम्मीदवार जितना ज्यादा शिक्षित होगा उतना ही ज्यादा विकास होगा

टिप्पणियाँ

  1. I Dr Harprem singh Gill fully support my literate and lawer with clean and heart and clean soul and pray to God for his big victory from ongoing Pb Assembly elections 2022 & have offered my services during the campaign of his elections and waiting for his orders

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