आखरी बॉल पर सिक्सर मारने की काबिलियत रखते हैं एनके शर्मा चुनावी रणभूमि में एनके शर्मा की सीधी टक्कर कांग्रेस प्रत्याशी सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों के साथ
शनाया चौहान :जीरकपुर
मौसम तो ठंड का जरूर है, लेकिन चुनावी माहौल में राजनीतिक तापमान काफी गर्म है। राजनीतिक गलियारों से जिस तरह की चुनावी गर्म हवाएं चल रही हैं, इन हवाओं का रुख कभी सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों की तरफ बहता नजर आता है और कभी शिरोमणि अकाली दल के दिग्गज विधायक एनके शर्मा की तरफ। अगर बात की जाए एनके शर्मा की, तो एनके शर्मा ने हलका डेराबस्सी में जिस तरह से पकड़ बनाई है, ऐसी पकड़ अभी तक किसी और राजनीतिक पार्टी के नेता नहीं बना पाए। एनके शर्मा ने सरपंच बनने के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा । एनके शर्मा अपने वक्त में सबसे कम उम्र में जीरकपुर नगर प्रधान बने थे । हालांकि उनका यह रिकॉर्ड सरदार उदयवीर सिंह ढिल्लों ने तोड़ा है, क्योंकि इस वक्त सरदार उदयवीर सिंह ढिल्लों एन के शर्मा से भी कम उम्र में जीरकपुर नगर प्रधान बने हैं ।हालांकि एनके शर्मा ने अपनी काबिलियत के दम पर हलका डेराबस्सी की विधायक सीट अपने नाम एक बार नहीं बल्कि दो बार की और इस वक्त वह विधायक सीट के लिए हैट्रिक पर हैं। एनके शर्मा का अकाली परिवार बहुत बड़ा है, जिसके चलते एनके शर्मा को लगातार जीत मिलती है । अगर हम बात करें कांग्रेस प्रत्याशी सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों की तो सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों ने 4 बार चुनावों में हार का सामना किया है, लेकिन इस बार सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों को हराना कहीं ना कहीं मुश्किल दिख रहा है, क्योंकि जिस तरह से हलके में सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लो के कांग्रेस परिवार में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कई नेता अकाली दल को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं और तीनों नगर परिषद पर कांग्रेस ही काबिज हैं। इसके चलते लग रहा है कि जनता इस बार विधायक सीट पर सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों के नाम की मुहर भी लगा सकती है, लेकिन एनके शर्मा जैसे दिग्गज नेता जहां मौजूद है, वहां पर कांटे की टक्कर होने वाली है, क्योंकि अगर किसी में लास्ट बॉल पर सिक्सर मारने की काबिलियत है, तो वह एनके शर्मा हैं।चुनावी हवाओं के मुड़ते रुख को अपनी तरफ करना एनके शर्मा बखूबी जानते हैं। अब बात करते हैं डेराबस्सी के विधायक सीट के लिए उम्मीदवारों के क्रिमिनल रिकॉर्ड की। अगर क्रिमिनल रिकॉर्ड की हम बात करें तो एनके शर्मा से लेकर आम आदमी पार्टी से कुलजीत सिंह रंधावा और बीजेपी से संजीव खन्ना पर भी कोई ना कोई मुकदमा तो दर्ज है, लेकिन इस मामले में सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों पूरी तरह साफ सुथरे हैं, क्योंकि उनके खिलाफ किसी तरह का कोई क्रिमिनल केस दर्ज नहीं है।
कांग्रेस में जहां पर आपसी मनमुटाव देखने को मिलता है,वही आम आदमी पार्टी भी इससे अछूती नहीं है आम आदमी पार्टी में भी आपसी मतभेद लगातार देखने सुनने को मिलते रहते हैं, लेकिन एन के शर्मा यहां पर भी टॉप पर हैं, क्योंकि एनके शर्मा का विरोध उनकी पार्टी में कभी देखने को नहीं मिला। इसकी वजह रही है कि एन के शर्मा शिरोमणि अकाली दल के वह दिग्गज नेता है जिसे रिप्लेस करना शिरोमणि अकाली दल के लिए नामुमकिन है और शिरोमणि अकाली दल में जो जगह एनके शर्मा द्वारा बनाई गई है, उसकी सभी इज्जत करते हैं और एनके शर्मा का विरोध करने का सवाल ही नहीं उठता । विधायक एनके शर्मा का जो वजूद हलका डेराबस्सी में देखने को मिलता है, उस वजूद के आगे बाकी राजनीतिक दल कहीं ना कहीं बौने साबित होते नजर आए हैं। इस बार मुकाबला टक्कर का है, लेकिन जैसा कि मैंने पहले कहा कि चुनावी पिच पर लास्ट बॉल पर सिक्सर मारना एन के शर्मा की काबिलियत है और इसी काबिलियत के बल पर वह चुनावी मैच जीतते आए हैं। शर्मा हमेशा फ्रंट फुट पर आकर बैटिंग करते हैं और हारे हुए मैच का रुख अपनी तरफ कर लेते हैं। इस बार जो चुनावी मैच होने जा रहा है उस मैच में जीत किसकी होती है, इसका फैसला तो आने वाले 10 मार्च को हो जाएगा, लेकिन फिलहाल सभी राजनीतिक दलों में जिस तरह की टक्कर चल रही है, उस टक्कर को देखते हुए हार जीत का सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है, लेकिन जीत किसकी होगी अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। एनके शर्मा जो कि चुनावी पिच पर खेलने वाले सबसे मजबूत खिलाड़ी क्या वह इस बार हैट्रिक पूरी कर पाएंगे या फिर इस बार मैच का रुख बदलने वाला है, यह बताएगा आने वाला 10 मार्च।
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