मेरे शहर के हाकिमो की नींद भी गजब है, शहर बर्बाद होता गया और यह सोते रहे।

शनाया चौहान: जीरकपर । शहर में जिस तरह से ठंड का माहौल बना हुआ है उस माहौल में लोगों द्वारा कोयले की अंगीठी जलाकर माहौल को गर्म करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन हलका डेराबस्सी में राजनीतिक दलों द्वारा आरोपों के अंगारे माहौल को वह गर्माहट अदा कर रहे हैं जिन अंगारों की तपिश से आरोप लगाने वाले उम्मीदवारों के हाथ भी कहीं ना कहीं जलते नजर आ रहे हैं । जहां तक बात की जाए हलका डेराबस्सी के उम्मीदवारों की तो उम्मीदवारों का ज्यादातर वक्त जो गुजर रहा है सिर्फ आरोपों के अंगारे सुलगाने में ही गुजर रहा है।  इस आग से कोई भी राजनीतिक दल अछूता नहीं है ।
उम्मीदवारों द्वारा अपने भाषणों में शहर के विकास को लेकर सिर्फ एक दूसरे पर कीचड़ उछाली जाती है, लेकिन जिनके हाथ में पहले शहर रह चुका है और जो आज शहर पर काबिज हैं, उन्होंने क्या किया है शहर के बुरे हाल के लिए । सभी एक दूसरे के कार्यकाल पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन कोई भी शहर की हालत की जिम्मेदारी अपने सर लेने को राजी नहीं है। आपसी छींटाकशी में व्यस्त रहने वाले राजनीतिक दलों के सभी नेता इल्जाम एक दूसरे के सर पर मढ़ देते हैं, लेकिन इन नेताओं से सवाल यह है कि जब शहर का विनाश हो रहा था, शहर में नाजायज कब्जे, नजायज इमारतें, नजायज अतिक्रमण, झूठी रजिस्ट्रीया, पानी की निकासी की दिक्कत और सड़कों का बुरा हाल हो रहा था, तब यह दोनों हाकिम, चाहे वह विधायक एनके शर्मा हो या फिर तीनों नगर परिषद पर काबिज सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों, कहां सोए थे???क्या यह बड़ा सवाल नहीं है कि कैसे इन दोनों हाकिमो के होते हुए कैसे शहर में इतना कुछ नाजायज हो गया।
आज विधायक शर्मा कह देते हैं कि उनकी सरकार ना होने से और पंजाब में कांग्रेस की सरकार होने की वजह से अकाली दल कुछ बड़े काम काम करवा ही नहीं पाया, क्योंकि पंजाब सरकार ने टांग अड़ा दी। सरदार दीपिंदर सिंह ढिल्लों कह देते हैं कि शहर में ज्यादा काम अभी तक इसलिए नहीं हो पाए क्योंकि आज भी तीनों नगर परिषदों में एनके शर्मा की जड़े मौजूद है।अब समझ में यह नहीं आ रहा है कि यह दोनों नेता जनता को बेवकूफ बना रहे हैं या समझ रहे हैं। 
अगर विधायक होने के बाद भी एनके शर्मा को पंजाब कांग्रेस की दुहाई देनी पड़े तो एनके शर्मा का विधायक होने का मतलब ही क्या रह जाता है???क्या एक विधायक शहर का विकास उस तरह से नहीं करवा सकता, जिस तरह से शहर की जनता को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं मिले। अगर राज्य में किसी और की सरकार है तो क्या विधायक दूसरी सरकार का हवाला देकर अपने द्वारा ना कराए गए कामों के सवाल पर खुद को बचा सकता है। अगर ऐसा है तो फिर जनता क्यों चुने विधायक। 
दूसरी तरफ सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों, जिनका कहना है कि डेराबस्सी के दिल पर 20 साल से जख्म लगे हुए हैं, जिन्हें भरने में कांग्रेस को टाइम लगेगा। नगर परिषद में जो भ्रष्टाचार फैला हुआ है, वह विधायक शर्मा का फैलाया हुआ है और विधायक शर्मा की जड़े आज भी तीनों नगर परिषद में मौजूद है ।अब सवाल दीपेंद्र सिंह ढिल्लों के सामने यह है कि अब आप काबिज है तीनों नगर परिषद पर। पिछले 8 महीनों में कराए गए विकास कार्यों की दुहाई आप दे रहे हैं । आप पिछले 8 महीनों के विकास कार्यों को गिना रहे हैं तो क्या पिछले 8 महीने का वक्त कम था भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए????क्यों नहीं पिछले 8 महीनों में से नगर परिषद में भ्रष्टाचार को उखाड़ कर फेंक दिया गया....क्यों भ्रष्टाचार की जड़ें आज भी तीनों नगर परिषद में मौजूद हैं???? 
एनके शर्मा का 20 साल का कार्यकाल और कांग्रेस का 8 महीने का नगर परिषद , लेकिन फिर भी शहर बर्बाद होता आया है और आज भी शहर बर्बादी की ओर ही चला जा रहा है  । 
आज शहर में हर जगह नाजायज इमारतें बन कर खड़ी हो रही है और कुछ नाजायज इमारतें जो पहले बन चुकी हैं, उन पर भी सवाल उठ रहे हैं। 80-80 फुट चौड़ी सड़क को बिल्डरों द्वारा 20-20 फुट कर दिया गया। शहर में आए दिन इतना भयंकर जाम लगा रहता है कि अगर कोई एंबुलेंस फँस जाए तो मरीज की जान भी जा सकती है। एक ही बारिश में शहर में सुनामी का माहौल दिखने लग जाता है। शहर की सड़कें तो इतनी मजबूत हैं कि सिर्फ खाली रिक्शा के चलने से भी गड्ढे बन जाते हैं। शहर की खस्ता हालत को अनदेखा कर चैन की नींद सोने वाले ये हाकिम एक दूसरे पर आरोप लगाने के लिए जाग उठते हैं।कहना सही होगा की मेरे शहर के हाकिमो की नींद भी गजब है, शहर लगातार बर्बाद होता रहा और यह सोते रहे।

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