अगर हुई एनके शर्मा की हैट्रिक तो उड़ जाएंगी कांग्रेस की धज्जियां,,,,,,सरदार दीपिंदर सिंह ढिल्लों तोड़ सकते हैं, "शर्मा की हैट्रिक का सपना"

शनाया चौहान: जीरकपुर
हलका डेरा बस्सी पंजाब विधानसभा की एक बेहद महत्वपूर्ण सीट है ।इस सीट के लिए सभी राजनीतिक दल वह सभी कोशिश कर रहे हैं, जो वह कर सकते हैं। इस वक्त शायद ही किसी भी उम्मीदवार को सुकून की नींद नसीब हो रही हो, क्योंकि इस बार पंजाब विधानसभा चुनावों में हारने का मतलब जीतने वाले प्रत्याशी से बहुत पीछे रह जाना है। 
इस वक्त हलका डेराबस्सी में जो सबसे ज्यादा टक्कर देखने को मिल रही है, वह टक्कर कांग्रेस प्रत्याशी सरदार दीपिंदर सिंह ढिल्लो और शिरोमणि अकाली दल के दिग्गज नेता एनके शर्मा के बीच है ।राजनीतिक गलियारों से जो चुनावी हवाएं बह रही हैं, उन हवाओं के जरिए यही संदेश आ रहे हैं कि सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों, जो कि पहले 4 बार हार का सामना कर चुके हैं और एनके शर्मा जो लगातार दो बार विधायक रहे हैं, इन दोनों के बीच कांटे की टक्कर होने वाली है और दोनों की ही इज्जत भी इस वक्त दांव पर लगी कही जा सकती है । एक तरफ  ढिल्लों लगातार बयान दे रहे हैं कि *अगर शर्मा ने विधायक पद पर रहते हुए कुछ विकास कार्य हलका में कराए होते तो आज उन्हें घर-घर में अपने नाम के कैलेंडर बांटने की जरूरत नहीं पड़ती* । वही एनके शर्मा भी लगातार शब्द रूपी बाणों से कांग्रेस पर वार कर रहे हैं। एनके शर्मा भी आरोप लगा रहे हैं कि *पिछले 8 महीनों में कांग्रेस ने हलका को पूरी तरह से लूट लिया है और अगर विकास कार्य कराए जाते हैं, तो उनकी दुहाईयां देकर उनके नाम पर वोट नहीं मांगे जाते। अगर विकास कार्य होते हैं तो जनता को दिखाई देते हैं।* 
आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तो लगातार जारी है ।दोनों ही नेताओं के भाषणों में विकास कार्य की बात  बहुत कम दिखाई देती है, लेकिन ज्यादातर भाषणों का वक्त एक दूसरे पर छींटाकशी करने में ही निकल जाता है। दोनों ही अपने अपने वादों और एक दूसरे पर आरोप लगाकर जनता का वोट हासिल करना चाहते हैं, लेकिन यहां जिस तरह के हालात हलका डेराबस्सी में देखने को मिले हैं, उन हालातों को देखते हुए ना तो किसी भी नेता को पूरी तरह सही कहां जा सकता है और ना ही एक दूसरे पर लगाई जा रहे इन आरोपों की झड़ी को पूरी तरह से गलत कहा जा सकता है । एनके शर्मा लगातार कांग्रेस के विकास कार्यों को लेकर सवाल उठाते हैं लेकिन लेकिन अगर सिर्फ लोहगढ़ की बात की जाए, जहां पर खुद एन के शर्मा रहते हैं, वही की हालत इतनी खराब है, की जरा सी बारिश में भी लोहगढ़ एक बहती नदी के समान दिखाई देता है। ना तो अकाली दल ने कभी लोहगढ़ की हालत को सुधारने की कोशिश की ना ही जीरकपुर नगर प्रधान का ध्यान इस तरफ गया। जबकि जीरकपुर नगर प्रधान की कोठी भी लोहगढ़ में मौजूद है और दोनों ही नेता दिन में कई बार लोहगढ़ की सड़कों से गुजरते हैं, लेकिन बारिश के दिनों में  लोहगढ़ की हालत पर ध्यान ना देने वाले  यह दोनों ही नेता एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की बारिश करना  कभी नहीं भूलते। खैर, यह राजनीति है, इसमें एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाना सभी राजनीतिक दल विकास करने या विकास की बात करने से ज्यादा जरूरी समझते हैं, पर एक बात तो तय है कि सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों और एनके शर्मा के बीच जो कांटे की टक्कर चल रही है, उस टक्कर में जिस किसी की भी हार होती है, उसके लिए इस हार को मंजूर करना एक बहुत बड़ी चुनौती होगी । क्योंकि साख का सवाल है। एनके शर्मा हैट्रिक पर हैं और सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों पहले 4 बार चुनाव हार चुके हैं । अगर सरदार दीपिंदर सिंह ढिल्लों एक बार फिर से हारते हैं, तो यह एक इतिहास की तरह लिखा जाएगा कि लगातार पांचवीं बार सरदार दीपेंद्र सिंह ढिल्लों को हार का सामना करना पड़ा और अगर एनके शर्मा इस बार हार जाते हैं तो भी इतिहास लिखा जाएगा कि एनके शर्मा हैट्रिक से चूक गए। 
लेकिन ध्यान देने वाली एक बात और यहां पर यह भी है हर सुबह और रात के बीच एक दोपहर भी होती है और एक मौसम ऐसा भी आता है जब लोगों को सुबह और रात की जगह दोपहर का मौसम ज्यादा सुहावना लगता है। अब देखना यह है कि सुबह और रात के बीच आने वाली दोपहर अगर लोगों को ज्यादा पसंद आ गई, तो पंजाब विधानसभा चुनाव का इतिहास कुछ और भी हो सकता है।

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